NCERT History Notes Class 12 Chapter 10

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NCERT History Notes Class 12 Ch 10 इस अध्याय में भारत औपनिवेशिक शासन की व्यवस्था एवम भारत मे तत्कालीन जमींदारों की स्थिति व कृषक विद्रोह के बारे में है।

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Class 12

आजकल इतिहास एक रोचक विषय बनाता जा रहा है| जिसमें मुख्य रूप से  इसके जानकारियों के स्रोतों में होने वाली वृद्धि के कारण संभव हुआ है| इतिहास को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है प्रथम प्राचीन इसके बाद मध्यकालीन व इसके बाद का समय आधुनिक काल के रूप में जाना जाता है| आज से कुछ वर्ष पहले तक पाठक इतिहास को पढ़ने तक बचते थे  परंतु अब पाठक भी इस विषय को रुचि से पढ़ते है|इस विषय को पढ़ने को बहुत से फायदे भी है जिसमे पहला ये है कि इससे हमारी तार्किक शक्ति बढ़ती है दूसरा फायदा ये है कि ये विषय बहूत से प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हमारी मदद करता है|

इतिहास विषय मे सूचनाओं व रोचक जानकारियों का भी भरमार है जिसमें हमें सामान्य अध्ययन के बहूत से सवालो का जवाब मिलता है| इतिहास हमे ये समझने में भी मदद करता है जिन परिस्थितियों में आज हम जी रहे है वही परिस्थितियां पुराने समय मे कैसी थी और समय के साथ इसमें कैसे बदलाव आया है। इतिहास को पढ़ते समय ये हमे विभिन्न परिस्थितियों से अवगत करवाती है जिसमे हम तत्कालीन समय के सभ्यताओं के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व धार्मिक मान्यताओं के बारे में पढ़ते है ।

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NCERT History Class 12 इस पुस्तक में मुख्य रूप से भारतीय इतिहास(प्राचीन,मध्य व आधुनिक) के बारे में बताया गया है| इस पुस्तक में कुल 15 अध्याय है और हमारे  द्वारा सभी पाठ के लिए नोट्स तैयार  किये गए है।


पिछले अध्याय के बारे में :इस अध्याय में  मुगल काल के शासको के बारे में बताया गया है। जिसमें इनके शासन के विशेषता के बारे में है।

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विषयवस्तु


1.ईंटे, मनके व अस्थियां


2.राजा,किसान व नगर


3.बंधुत्व, जाति तथा वर्ग


4.विचारक, विश्वास और इमारते


5.यात्रियों के नजरिये


6.भक्ति-सूफी परंपराए


7.एक साम्राज्य की राजधानी-विजयनगर


8.किसान,जमींदार और राज्य


9.शासक व इतिवृत


10.उपनिवेशवाद व देहात


11.विद्रोही और राज


12.औपनिवेशिक शहर


13.महात्मा गांधी व राष्ट्रीय आंदोलन


14.विभाजन को समझना


15.संविधान का निर्माण


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अध्याय 10

उपनिवेशवाद व देहात

प्रस्तावना

इस अध्याय में भारत औपनिवेशिक शासन की व्यवस्था एवम भारत मे तत्कालीन जमींदारों की स्थिति व कृषक विद्रोह के बारे में है।

1.औपनिवेशिक शासन की सर्वप्रथम स्थापना बंगाल में| 1793 में राजस्व की नई व्यवस्था (इश्तमरारी-निश्चित राशि न अदा करने पर संपदा नीलाम होती|


2.1770 से प्रारंभ से बंगाल में कई बार अकाल जिसके कारण पैदावार में गिरावट आती थी| 19वी सदी में गांव में जमींदारों की सत्ता मजबूत|


3.जमींदार गांव  के भूस्वामी नही थे लेकिन राजस्व संग्राहक थे| राजस्व अदा करने में देरी कारण- मांग ऊंची थी, इस समय कृषि की पैदावार अच्छी नही, राजस्व असमान था,जमींदारों के पास सीमित अधिकार थे|


4.18वी सदी में जोतदारों का उदय,19वी सदी में स्थानीय व्यापार पर नियंत्रण स्थापित किया,इनके भूमि पर बटाईदार अपने संसाध्नों से खेती करता और फसल का आधा हिस्सा भी देता| इनके कही मंडल  तो कही हवलदार कहा जाता|


5.1813 में पांचवी रिपोर्ट(भारत मे ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन के बारे में,ब्रिटेन में बहुत से समूह ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के विरुद्ध| 18वी सदी में कमपनी के लिए अनेक अधनियम बने|

6.पहाड़ी लोग गरीब,गुजरा जंगल के उत्पादों से,झूम खेती करते, मुखिया शांति व्यवस्था बनाता व लड़ाई के समय नेतृत्व करता| अंग्रेज जंगल को उजाड़ मानते|


7.1780 के दशक में संथालों का आगमन बंगाल में,निचले पहाड़ियों पर कब्ज़ा,इन्होंने जंगलो को कृषि के लिये काटा|


8.अंग्रेजो ने इन्हें बसने के लिए  जमीन (दामिन-ए-कोह) दी| पहाड़ी लोग इन्हें पसंद नही करते| बाद में अंग्रेजो ने संथाल की जमीन पर भारी कर लगाया|1855-56 में संथालोने। विद्रोह कर दिया|


9.अनेक किसानों ने साहूकारों व अनाज व्यापारियों के खिलाफ विद्रोह किया| हालांकि बाद में लोगू को दंड भी दिया गया|


10.बम्बई दक्कन में रैयतवारी व्यवस्था-राजस्व राशि सीधे रैयत के साथ -भूमि से होने वाली औसत आय के अनुसार, राजस्व दर बहुत ऊंची,राजस्व न अदा करने पर सम्पति जब्त, पूरे गांव पर जुर्माना|


11.1832-34 के बीच भयंकर अकाल भी पड़े| 1860 के दशक तक ब्रिटेन कपास आपूति  का 3/4 हिस्सा अमेरिका से,1861 अमेरिका में ग्रहयुद्ध, कप्स आपूर्ति अब भारत से|

12.इससे भारतीय कपास  की मांग में वृद्धि|1865  अमेरिका गृहयुद्ध समाप्त| अब भारतीय कप्स की मांग भी बहुत गिरावट आई|


13.ऋण को नियंत्रित करने के लिए1859 में परिसीमन कानून(ऋणदाता व रैयतों के बीच ये अनुबंध 3 वर्ष तक मान्य) ताकि रैयतों से ज़्यादा पैज़ न वसूला जाए परन्तु इसका ज़्यादा असर देखने को नही मिला|


14.बम्बई मे सरकार ने दंगो की जांच के लिए आयोग बनाया इसकी रिपोर्ट(1878,  ब्रिटिश संसद में) दक्कन दंगा आयोग के नाम से इसने भी माना कि राजस्व की दर ऊंची थी|  
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अगला अध्याय
इस अध्याय में  1857 के विद्रोह के बारे में बताया गया है । जिसे प्रथम स्वंतंत्रता संग्राम के नाम से भी जाना जाता है।

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