NCERT History Notes Class 12 Chapter 9

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NCERT History Notes Class 12 Ch 9 इस अध्याय में मुगल काल के शासको के बारे में बताया गया है। जिसमें इनके शासन के विशेषता के बारे में है।

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Class 12

आजकल इतिहास एक रोचक विषय बनाता जा रहा है| जिसमें मुख्य रूप से इसके जानकारियों के स्रोतों में होने वाली वृद्धि के कारण संभव हुआ है| इतिहास को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है प्रथम प्राचीन इसके बाद मध्यकालीन व इसके बाद का समय आधुनिक काल के रूप में जाना जाता है| आज से कुछ वर्ष पहले तक पाठक इतिहास को पढ़ने तक बचते थे परंतु अब पाठक भी इस विषय को रुचि से पढ़ते है|इस विषय को पढ़ने को बहुत से फायदे भी है जिसमे पहला ये है कि इससे हमारी तार्किक शक्ति बढ़ती है दूसरा फायदा ये है कि ये विषय बहूत से प्रतियोगी परीक्षाओं में भी हमारी मदद करता है|

इतिहास विषय मे सूचनाओं व रोचक जानकारियों का भी भरमार है जिसमें हमें सामान्य अध्ययन के बहूत से सवालो का जवाब मिलता है| इतिहास हमे ये समझने में भी मदद करता है जिन परिस्थितियों में आज हम जी रहे है वही परिस्थितियां पुराने समय मे कैसी थी और समय के साथ इसमें कैसे बदलाव आया है। इतिहास को पढ़ते समय ये हमे विभिन्न परिस्थितियों से अवगत करवाती है जिसमे हम तत्कालीन समय के सभ्यताओं के आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व धार्मिक मान्यताओं के बारे में पढ़ते है । ncert history class 12 chapter 9 in hindi

NCERT History Class 12 इस पुस्तक में मुख्य रूप से भारतीय इतिहास(प्राचीन,मध्य व आधुनिक) के बारे में बताया गया है| इस पुस्तक में कुल 15 अध्याय है और हमारे द्वारा सभी पाठ के लिए नोट्स तैयार किये गए है।


पिछले अध्याय के बारे में :इस अध्याय में  मुगलकाल के कृषि व्यवस्था के बारे में बताया गया है। जिसमे किसान,जमींदार व राज्य की भूमिका के बारे में है।

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विषयवस्तु


1.ईंटे, मनके व अस्थियां


2.राजा,किसान व नगर


3.बंधुत्व, जाति तथा वर्ग


4.विचारक, विश्वास और इमारते


5.यात्रियों के नजरिये


6.भक्ति-सूफी परंपराए


7.एक साम्राज्य की राजधानी-विजयनगर


8.किसान,जमींदार और राज्य


9.शासक व इतिवृत


10.उपनिवेशवाद व देहात


11.विद्रोही और राज


12.औपनिवेशिक शहर


13.महात्मा गांधी व राष्ट्रीय आंदोलन


14.विभाजन को समझना


15.संविधान का निर्माण


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अध्याय 9

शासक व इतिवृत

प्रस्तावना

इस अध्याय में मुगल काल के शासको के बारे में बताया गया है। जिसमें इनके शासन के विशेषता के बारे में है।


1.मुगलो ने दरबारी इतिहासकारों को बादशाह के समय की घटनाओं का लेख जख लिखने का कार्य  सौंपा| इतिहासकारों ने इस शैली को क्रोनीकल्स(इतिवृत) कहा|


2.मुगल नाम की उत्पत्ति मंगोल से ये अपने को तैमूरी कहते| पहला शासक बाबर(तुर्की बोलता)| उत्तराधिकार हुमायू से साम्राज्य विस्तार किया| 1556 में मृत्यु|


3.अकबर(1556-1605),जहांगीर(1605-27),शाहजहां(1628-58),औरंगज़ेब(1658-1707) 1857 में अंतिम बादशाह बहादुरशाह ज़फर द्वितिय को राजा के पद से हटा के जेल भेज गया|


4.इतिहास(साहित्य) फ़ारसी भाषा मे लिखा गया| अकबर ने फ़ारसी को दरबारी भाषा बनाया| शाही किताबखाना पांडुलिपियों की रचना का केंद्र| इससे सुलेखन -बहुत की शैली- अबक़ाब को पसंद,नस्तलिक|


5.मुगलकाल में ईरान से अनेक कलाकार भारत आये| अवसर  की तलाश व संरक्षण के कारण यही बस गये|


6.अबुल फजल-अरबी,फ़ारसी,यूनानी दर्शन व सूफीवाद का महान ज्ञाता| 1602 में अबुल फजल की हत्या राजकुमार सलीम व साथी बियर सिंह बुंदेला ने जाल में फँसकर की|


7.अब्दुल हमीद लाहौरी (फ़ज़ल का शिष्य) बाबरनामा 3 जिल्द में |


8.19वी सदी में एसियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल ने अकबरनामा व बाबरनामा को सर्वपप्रथम प्रकाशित किया|


9.सुलह ए कुल की नीति-सभी धर्मों व मत्तो को अभिव्यक्ति की स्वीकृति शर्त थी कि राज्य सत्ता को नुकसान न हो|


10.अकबर ने 1563 में तीर्थयात्रा कर व 1564 में जजिया कर समाप्त कर दिया|औरंजेब ने दुबारा इसे चालू किया|


11.बाबर ने अनेक राजधानी बनाई| 1560 के दशक में अकबर आगरा के किला बनाया| 1570 के दशक में फतेहपुर। सीकरी को राजधानी बनाया|


12.बुलंद दरवाजा गुजरात विजय के उपलक्ष्य में बनाया गया|1585 में राजधानी लाहौर|1640 राजधानी आगरा से शाहजनाबाद |


13.दरबार मे किसी की हैसीयत का अंदाजा इस बात से की वो राजा के कितने पास बैठता है|


14.बादशाह अपने दिन की शुरुआत धार्मिक प्रार्थना से, इसके बाद वो छज़े पर जाता जिसके नीचे लोग(भारी भीड़) उसका इंतजार करते|(झरोखा दर्शन| इसके बाद दीवान के आम(सार्वजनिक सभा मे) जाता| इसके बाद दीवान ए खास(गोपनीय सभा)|


15.अकबर ने बीरबर को, औरंगजेब ने जय सिंह व जसवंत सिंह को राजा की पदवी दी|


16.मुगलो की औरत को हरम कहा गया| मुगलो ने वैवाहिक संबंध के माध्यम से साम्राज्य का विस्तार किया| शाही परिवार से आने वाली स्त्रियां बेगम व अन्य औरते अगहा कहलाती| उपपत्नियां(अगाचा) की स्थिति सबसे खराब|


17.जहाँआरा(चांदनी चौक की रूपलेखा भी बनाई) व रोशनआरा को ऊंचे मनसब के समान आय होती थी| गुलबदन बेगम ने हुमायूंनामा(हुमांयू की बहन) पुस्तक लिखी|


18.1560 में राजपूत व भारतीय मुसलमान ने शाही सेवा में प्रवेश किया| पहला व्यक्ति अम्बेर राजा भारमल(पुत्री का विवाह अकबर से)|


19.जहांगीर ने ईरानियों व औरंगजेब ने राजपूतो को उच्च पद दिया|


20.दो तरह के ओहदे जात (मनसबदार के पद व वेतन का सूचक), सवार((उसे कितने गुरसवार रखना अपेक्षित) है|मनसबदार की शुरुआत अकबर ने की 17वी सदी में 1000 से अधिक मनसब वाला अमीर कहे गए|


21.केंद्रीय मंत्री दीवान ए आला(वित्त मंत्री), सद्र उस सुदूर(स्थानीय न्यायधीश(काजी) की नियुक्ति की प्रभारी), ये स्वतंत मंत्री थे| दरबारी लेखकों का निरीक्षण मीर बक्शी(सबसे अधिक वेतन) करता था|


22.प्रांतीय शासन का प्रमुख गवर्नर| स्थानीय प्रशासन-कानूनगो(राजस्व आलेख का रखवाला),चौधरी(राजस्व संग्रह का प्रभारी) व काजी के देखरेख में| 


23.अक्सर स्थानीय जमींदारों व मुगल साम्राज्य के प्रतिनिधियों के बीच संगर्ष होते थे|


24.हरकारा पद्धति(दल के लोग दिन रात दौड़ते रहते ताकि किसी भी सूचना को राजा तक पहुंचाया गया)|


25.बदशाहो द्वारा शहंशाह,जहांगीर(विश्व पर कब्ज़ा करने वाला),शाहजहां(विश्व का राजा| सफ़ावियो व मुगलो के बीच झगड़े होते कारण-कंधार|1595 में अकबर ने इसे जीता|


26.1580 में पहला जेसुइट शिष्टमंडल फतेहपुर सीकरी के दरबार मे आया| 2 वर्ष रहा| इसके कारण दरबार मे अंतर-धर्मीय वाद विवाद का जन्म| परन्तु अकबर को बाद में समझ आया कि धर्म की रूढ़िवादिता से दूर रहना चाहिए|


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अगला अध्याय

इस अध्याय में भारत औपनिवेशिक शासन की व्यवस्था एवम भारत मे तत्कालीन जमींदारों  की स्थिति व कृषक विद्रोह के बारे में है।

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